गंगा सिर्फ नदी नहीं है, गंगा लाखों लोगों के लिए मां का आंचल है?


कृष्णकांत 
गंगा सिर्फ नदी नहीं है। गंगा लाखों लोगों के लिए मां का आंचल है, घर और बिस्तर है, अन्नदायिनी है, जीवन है, जीवन-रेखा है और जीवन की सीमा-रेखा भी। लाखों लोगों के लिए गंगा का तट ही असली संसार है।
गंगा कोई देवी नहीं है, बल्कि इस देश की तमाम आस्थाओं, विश्वासों, ज़रूरतों की मूल स्रोत भी है और संवाहक भी। गंगा एक सभ्यता की जननी और कई संस्कृतियों का एक विशाल समूह है।
मुझे लगता है कि इस देश ने गंगा के साथ छल किया है। अब भी समय है, क्या इस छल का पश्चाताप करते हुए गंगा की निर्मलता उन्हें लौटाई नहीं जा सकती?
ये तस्वीर पिछले साल आज ही के दिन खींची थी। बाढ़ से उफनती गंगा की धारा पर किसी को चैन की नींद लेते  देखना अद्भुत अनुभव था।

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