यूपी में नौकरी घोटाला: नौकरी तो मिली लेकिन दो दशक बाद भी नियुक्ति नही मिली


अमन पठान
लखनऊ/एटा। जहां एक ओर सरकारी विभागों में तमाम पद रिक्त हैं जिन पर भर्तियां नही हो रही हैं। जिनकी परीक्षाएं हो चुकी हैं उनका परिणाम नही आ रहा है और जिनका परिणाम आ चुका है उन्हें नियुक्ति नही मिल रही है।
एटा जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। एक व्यक्ति को नौकरी तो मिली लेकिन दो दशक बीत जाने के बाबजूद उसे नियुक्ति नही मिली है। सरकारी दफ्तरों और कोर्ट कचहरी की परिक्रमा लगा लगाकर फरियादी थक चुका है। सरकारें बदल गईं। फरियाद सुनने वाले अफसर सेवानिवृत्त हो गए लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
आपको बता दें कि एटा जिले के मारहरा निवासी नाथूराम गुप्ता के पुत्र दिनेश कुमार गुप्ता को वर्ष 1998 में तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार में सूचना विभाग में उप संपादक के पद पर नौकरी मिली लेकिन नियुक्ति आज तक नही मिली है। दिनेश कुमार गुप्ता ने नियुक्ति के लिए तमाम सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा तो फरियादी नियुक्ति की मांग को लेकर न्यायालय की शरण में गया।
वर्ष 2012 में पूर्व सूचना निदेशक बादल चटर्जी ने शपथ पत्र देकर उच्च न्यायालय को अवगत कराया कि दिनेश कुमार गुप्ता को नियुक्ति दे दी गई है लेकिन हकीकत यह है कि दिनेश कुमार गुप्ता को अभी तक नियुक्ति मिली ही नही है। एक लंबा समय बीत जाने के बाबजूद नियुक्ति न मिलना सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।
नौकरी मिलने के बाद नियुक्ति न मिलना एक तरह से नौकरी घोटाला है। दिनेश कुमार गुप्ता तो एकमात्र उदाहरण हैं ऐसे न जाने कितने लोग होंगे जिन्हें अपनी नियुक्ति का इंतजार होगा और वो नियुक्ति के संघर्ष में जद्दोजहद कर रहे होंगे।

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