संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हो रहा है लेकिन सरकार ने कोरोना का बहाना बना कर प्रश्न काल को ही गायब कर दिया?


गिरीश मालवीय 
संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हो रहा है लेकिन इस बार सरकार ने कोरोना महामारी का बहाना बना कर प्रश्न काल को ही गायब कर दिया राज्य सभा सचिवालय की जारी अधिसूचना के अनुसार इस बार मानसून सत्र के दौरान कोई प्रश्नकाल नहीं होगा, शशि थरूर सही कह रहे है कि यह बहुमत की तानाशाही है
दरअसल बिना प्रश्नकाल के संसद चलने का कोई अर्थ ही नही है आज जो ये कोरोना - कोरोना की हाय मचा रहे हैं आप जानते है कि जब पिछले सत्र में 18 मार्च को राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन, सुखेंदू शेखर राय और उनकी पार्टी के अन्य सदस्य मास्क पहनकर सदन में आए थे। तब इनकी क्या प्रतिक्रिया थी ?
तब उस दिन संसद सदस्यों के कोरोना के कारण मास्क पहने जाने पर सभापति वेंकैया नायडू ने कड़ा ऐतराज जताया था और कहा था कि सदन में इसकी इजाजत नहीं है. ............वेंकैया नायडू ने सांसदों को मास्क उतारने कहा था उन्होंने कहा था कि यह सदन की परंपरा नहीं है।
उस वक्त उन्हें जवाब देते हुए कांग्रेस के पी. चिदंबरम ने कहा कि मास्क लगाना सदन की परंपरा नहीं है लेकिन यह विशेष परिस्थिति है। अगर कोई सदस्य अपने आप को असुरक्षित महसूस करता है तो उन्हें मास्क लगाकर सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दे जानी चाहिए। .....
ऐसा है इनका रवैया..........

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