इस वजह से छूट गया 23 साल पुराना साथ, टूट गया अकाली दल और भाजपा का गठबंधन


किसान बिल को लेकर नाराज चल रही शिरोमणि अकाली दल ने NDA के साथ अपना नाता तोड़ लिया है। बता दें कि शिरोमणि अकाली दल की नेता और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने संसद में पेश किए गए कृषि से संबंधित दो विधेयकों के विरोध में पिछले हफ्ते बृहस्पतिवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। 

हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार में अकाली दल की एकमात्र प्रतिनिधि थीं और अकाली दल, भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी भी थी। लेकिन अब शिरोमणि अकाली दल ने एनडीएस ने नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है। इसी के साथ एनडीए के साथ लगभग 22 साल पुराना रिश्ता टूट गया है। 

दरअसल विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए सुखबीर ने कहा था कि पंजाब के किसानों ने अन्न के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अकाली दल नेता ने लोकसभा में कहा था, ''मैं एक घोषणा करना चाहता हूं कि हमारी मंत्री हरसिमरत कौर बादल मंत्रिमंडल से इस्तीफा देंगी।" 

सुखबीर ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी ने शुरू में इन अध्यादेशों का समर्थन किया था। बतादे कि शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के नेताओं ने सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करते हुए हाल में सदनों से पारित करवाए गए कृषि बिलों को मंजूरी नहीं देने का अनुरोध किया है। 

किसानों से संबंधित ये बिल लोकसभा के बाद रविवार को राज्यसभा से भी पास हो गए हैं। एसएडी ने इन बिलों को 'किसान विरोधी' बताया है। तो वही दूसरी तरफ हरसिमरत कौर ने ट्वीट करते हुए कहा था, मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों की बेटी और बहन के तौर पर उनके साथ खड़े होने पर गर्व है। 

गौरतलब कि शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच उस समय नाराजगी खुलकर सामने आ गई थी जब किसान बिल के विरोध में अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।एनडीए से अलग होने का फैसला अकाली दल के चीफ सुखबीर सिंह बादल ने पार्टी की कोर कमिटी के साथ बैठक मे लिया है। इस बैठक में पार्टी के कई बड़े पदाधिकारी भी मौजूद थे। 


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