इस तरह लड़ी जाती है किसानों के हक की लड़ाई

इनका नाम है नाथाराम गोदारा! किसान आंदोलन के दौरान चोट लगने के बाद इन्हें कमरे में बिठा दिया गया था. इनका लड़का जो उसी अनाज मंडी (पीपली) में वही रहता है उनके घर पर ही 20 मिनट आराम किया। जब उनका दर्द कम हुआ तो बोले मुझे वही वापस आंदोलन में जाना है।
लाख मना करने के बाद भी नहीं माने और दोबारा आंदोलन में गए क्योंकि इनकी रगों में किसान का खून दौड़ता है. उसके बाद ही इनकी फ़ोटो सोशल मीडिया में वायरल हुई।
नाथाराम जी 50 साल से किसान की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं. यह दादा सन 1986 में दादा महेंद्र सिंह टिकैत से भी मुलाकात कर चुके हैं।

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