बेरहम योगी सरकार ने डॉक्टर कफील खान को बेमतलब तड़पाया !


अंकुर मौर्य 
सुनिए और सुनाइए कहानी एक डॉक्टर की.. उस डॉक्टर की जिनके लिए सरकार उनके सम्मान में थाली, ताली और घंटी बजवाती है.. मौजूदा समय में एक "डॉक्टर" सीमा पर खड़े किसी जवान की तरह है.. लेकिन इस डॉक्टर की कहानी एक आम डॉक्टर की नहीं है ये डॉक्टर न केवल सिर्फ लोगो की जान बचाता है.. साथ में ये डॉक्टर मौजूदा मुद्दों पर खुल के अपने विचार रखता है, सरकार की नीतियों की आलोचना करता है.. जिनका नाम है डॉक्टर "कफील खान"..
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इनके साथ जो किया वो बेहद ही शर्मनाक ही.. जिसमें टीवी चैंनलों ने सरकार का खूब चाट-चाट कर योगदान दिया और कफील खान को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी.. आलम ये था कि योगी सरकार की पुलिस ने 29 फरवरी 2020 से डॉक्टर कफील खान को जेल में कैद कर रखा था.. लेकिन सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं.. आज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें रिहा किया और कोर्ट ने सरकार पर जो टिप्पणी की है उससे सरकार की आंखे खुली की खुली रह गयी..
कफील खान चर्चा में उस वक्त आये थे जब गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सिजन की कमी से भारी तादाद में बच्चों की मौत हो गयी थी. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने लापरवाही बरतने, भ्रष्टाचार में शामिल होने सहित कई आरोप लगाकर डॉ. कफ़ील को निलंबित कर जेल भेज दिया था.. सरकार ने अपनी कमियों  को छुपाने के लोए किया.. वहीं कई मामलों काफिला को सरकार से क्लीन चिट मिल गई थी लेकिन उनका निलंबन रद्द नहीं हुआ था..
वहीं कफ़ील को अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ छात्रों की एक सभा में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में NSA लगाकर कर गिरफ्तार किया गया.. (NSA तब लगाई जाती है जब देश की सुरक्षा को किसी व्यक्ति से खतरा हो) लेकिन जिस सभा में कफील भाषण दे रहे थे  उसमें सामाजिक चिंतक योगेंद्र यादव भी मौजूद थे और उन्होंने कई बार साफ किया है कि डॉ. कफ़ील ने कुछ भी ऐसा नहीं कहा था जो देश की सुरक्षा, अखंडता व संविधान के ख़िलाफ़ हो। इस सबके बाद भी डॉ. कफ़ील पर यूपी सरकार ने NSA लगाई और उसकी मियाद दो बार बढ़ाई भी...
लेकिन आज आधीरात को कफील रिहा हुए..उन्हें न्याय मिला, कोर्ट ने सरकार को चारों खाने चित करते हुए कहा कि कफ़ील ख़ान को NSA के तहत गिरफ़्तार किया जाना 'ग़ैरक़ानूनी' है और कफील को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया.. आदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, "डॉक्टर कफ़ील ख़ान का भाषण किसी तरह की नफ़रत या हिंसा को बढ़ावा देने वाला नहीं था, बल्कि यह लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता का आह्वान था...
यह फैसला बतलाता है कि कफील के खिलाफ कैसे जानबूझकर , एक एजेंडे के तहत उन्हें परेशान किया गया, गोदी मीडिया ने बढ़-चढ़ कर कफील पर आरोप  लागाए.. अगर यह एजेंडा उनका धर्म देख कर किया गया, एक कॉम को बदनाम करने के लिए किया गया तो ये बेहद ही शर्मनाक है.. आज बो तमाम पत्रकार मुह पर ताला लगाकर बैठे है जो कल तक चीख-चीख कर कफील के खिलाफ अपना गला फाड़ रहे थे..
कफील को आज न्याय मिला ..जो आज नहीं तो कल मिलना ही था.. उनके इस न्याय ने उन तमाम लोगों को हिम्मत दी है जो सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाते है.. उन तमाम लोगों का हौसला बढ़ा है जो अपने हक के लिए लड़ते है.. कफील खान इस युग के एक नए क्रन्तिकारी बनकर उभरे हैं..

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