यह कटौती हाथी के दांत की तरह ही है दिखाने की कुछ और खाने की कुछ और



गिरीश मालवीय 

इस खबर पर ध्यान दीजिए ......ये आने वाले 'अच्छे दिनो' की सूचक है ......लोकसभा में सोमवार को सांसदों के वेतन में एक वर्ष के लिये 30 प्रतिशत कटौती करने वाला एक विधेयक पेश किया गया जिसका उपयोग कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति से मुकाबले के लिये किया जायेगा........ऊपर से यह बहुत अच्छी बात लगती है पर यह सिर्फ एक कैच है, ताकि तमाम सरकारी कर्मचारी मछली बनकर अपने वेतन भत्तों में 30 प्रतिशत कटौती वाला चारा आसानी से निगल ले 

कुछ साल पहले ही सांसदों का वेतन भत्ते में बेतहाशा वृद्धि की गई थी इसलिए उनको इससे कोई फर्क नही पड़ेगा लेकिन कोरोना के नाम पर लाखों छोटे सरकारी कर्मचारियों के वेतन भत्तों में 50 प्रतिशत तक कि कटौती कर दी जाएगी और ज्यादा बात करने पर यह खबर दिखा दी जाएगी कि पहले हमने सांसदों का वेतन भी काटा है

अब तक सासंदो को 1 लाख रु प्रतिमाह  वेतन मिलता था अब 70 हजार मिलेगा अभी तक उन्हें 60 हजार रूपये के कार्यालय भत्ते मे  मिलते थे जिसमें सिर्फ स्टेशनरी के रूप में मिलने वाले 20 हजार रूपये को कम करके 14 हजार रूपये किया गया है. जबकि निजी सहायक के लिए प्रति माह मिलने वाले 40 हजार रूपये में कोई कटौती नहीं की गई है.

यानी यह कटौती हाथी के दांत की तरह ही है दिखाने की कुछ और खाने की कुछ और

दरअसल हर लोकसभा सांसद को प्रत्येक वर्ष औसतन 71.29 लाख रुपये का वेतन-भत्ता मिलता आया है जबकि हर राज्यसभा सांसद को इस मद में प्रत्येक साल औसतन 44.33 लाख रुपये की रकम अदा की जाती रही है मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने 2018 में यह जानकारी RTI के जरिए निकाली थी

साफ दिख रहा है कि सांसदों की इस कटौती के बाद सरकारी कर्मचारियों और संविदा कर्मचारियों के वेतन भत्ते पर बड़े पैमाने पर कटौती की जाएगी, कल एक मित्र बता रहे थे कि रेलवे में दीवाली के पहले कर्मचारियों को मिलना वाला बोनस भी इस बार मुश्किल मे दिख रहा है बड़े पैमाने पर पेंशन देने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है ,


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