फसल बीमा का मुआवजा मिला चार रूपये, किसान ने कहा- थोड़ा और डाल देते जहर की बोतल खरीद लेता


सौमित्र रॉय 

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कल एक क्लिक में किसानों के खाते में पिछले साल के फसल बीमा की रकम डाल दी। सरकारी विज्ञापनों पर जिंदा राज्य के बिके हुए अखबारों ने मामा के खूब गुण गाए।

खंडवा जिले में अधिकांश किसानों के खाते में एक और दो अंकों में पैसा आया है। खालवा तहसील के पाडल्या माल गांव में रहने वाले जगदीश गोंड के खाते में 4 रुपए आए तो उसने कहा- थोड़ा और दे देते तो जहर की पूरी बोतल ही आ जाती। छैगांवमाखन ब्लॉक के सिर्रा गांव के किसान रामदीन पटेल को मात्र 27 रुपये की बीमा राशि मिली है।

उनके पास 9 एकड़ जमीन है और सोयाबीन की फसल लगाई थी। अब तो मोदी सरकार ने खेती को कंपनियों के हवाले कर दिया है। कल मोदी ने किसानों से कितना बड़ा झूठ बोला, यह एक कहानी में समझिए।

पंजाब में फिल्लौर की एक कंपनी से हुए एग्रीमेंट के आधार पर गांव दुग्गां, लोंगोवाल, गिदड़ियानी के किसानों ने टमाटर की खेती की। टमाटर का मूल्य 6.50 रुपये किलो तय हुआ था। चार माह में इस फसल पर किसानों ने दिन रात मेहनत की।

लॉकडाउन में लेबर की किल्लत के बावजूद महंगे दाम पर लेबर लगाकर टमाटर तुड़वाए गए व ट्रकों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में कंपनी के पास टमाटर पहुंचाने का प्रबंध भी कर दिया। अभी तक किसानों को उनके खून-पसीने की कमाई का एक पैसा तक भी नहीं मिला है।

एग्रीमेंट के अनुसार तो किसानों को फसल की अदायगी 21 दिन के भीतर की जानी थी, लेकिन किसानों की करीब 1.50 करोड़ रुपये नहीं मिले। कंपनी अब 30 फीसदी रकम काटकर लगाकर भुगतान करने की बात कह रही है। अब या तो किसान पुलिस में जाएं या कोर्ट में। उन्हें न्याय कौन देगा ?


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