भारत में अपनी हरकतों की वजह से कानूनी झमेलों में उलझा फेसबुक, इस निर्णय से आपको हो सकती है मुश्किल


सौमित्र रॉय 
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में है। आपमें से बहुतों को फेसबुक का यह अलर्ट मैसेज आया होगा। बहुतों की वॉल पर भी यह मौजूद है। इसका मतलब क्या है? आपकी पोस्ट पर इसका क्या असर होगा?
यह फेसबुक की सेवा शर्तों के सेक्शन 3.2 में बदलाव है। फेसबुक आपके कंटेंट के लिए ज़िम्मेदार नहीं होगा। यानी आपका कंटेंट चाहे जितना भी अच्छा, तर्क, तथ्य, प्रमाणिक क्यों न हो, अगर फेसबुक को ऐसा लगे कि पोस्ट को अनुमति देकर वह कानूनी झमेले में पड़ेगा तो आपकी पोस्ट नहीं दिखेगी।
एक अक्टूबर से होने जा रहे इस बदलाव से पहले तय कर लें कि क्या करना है। अपनी वॉल को तस्वीरों और ऊटपटांग शायरियों या नसीहतों से संवारना है या कुछ पढ़वाना भी है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत में फेसबुक अपनी हरकतों की वजह से कानूनी झमेलों में उलझा है।
फेसबुक इससे निकलना चाहता है। वह मेरे जैसे सवालियों की पोस्ट पहले उतारेगा। झूठ, दुष्प्रचार और नफरत का जहर फैलाने वालों के साथ शायद अभी जैसी नरमी बरती जाए। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यूं भी तो फेसबुक के सीईओ ज़करबर्ग को चिट्ठी नहीं लिखी होगी?
फेसबुक ने अपने नए कदम को अमल में लाने की कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। कर भी दें तो उसका इस्तेमाल झूठे, मक्कार लोगों पर नहीं होगा। दो विकल्प हैं- या तो आप फेसबुक को नमस्ते कह दें या इसमें खूंटा गाड़कर कुएं में मगरमच्छ से बैर निभाएं।
हर जहरीली पोस्ट, फेक न्यूज़ को जितना हो सके बेनकाब करें। इसकी शिकायत करें। लड़ाई लंबी चल सकती है, पर जीत सच की ही होगी। हां, अपनी भाषा, विरोध की हद को ध्यान में रखें और दूसरों के बहकावे में आकर खुद भी फेक न्यूज़ न फैलाएं।

Comments

Popular posts from this blog

Bollywood Celebrities Phone Numbers | Actors, Actresses, Directors Personal Mobile Numbers & Whatsapp Numbers

जौनपुर: मुंगराबादशाहपुर के BJP चेयरमैन ने युवती के साथ कई महीने तक किया बलात्कार, देखें वायरल वीडियो

किन्नर बोले- अगर BJP से सरकार नहीं चल रही है तो हमें दे दे कुर्सी, हम सरकार चलाकर दिखा देंगे