भूख ने ले ली बच्चे की जान, मां बेटे के शव को चीटियों से बचाने के लिए करती रही ऐसा...


चेन्नई।  कहते है मां तो मां ही होती है अपने बच्चों के लिए चाहे कोई जानवर हो या फिर इंसान।  एक मां ऐसी भी जो पति द्वारा छोड़ दिए जाने के बाद मानसिक विक्षिप्त हो गई लेकिन अपने 7 साल के बच्चे के लिए मिसाल बनी रही। खाने को कुछ भी नहीं रहा लेकिन कहीं उसके बच्चे को कोई छीन न ले इसलिए कमरे से बाहर नहीं निकली।

खुद भी भूखी रही और बच्चा भी। खुद कमजोर हो गई लेकिन बच्चा भूख बर्दाश्त नहीं कर पाया और मर गया। लेकिन बच्चे की लाश को मां दिन रात तीन दिन तक लगतार सिर्फ इस लिए गीले कपड़े से पोंछती रही कि कही उसके जिगर के टुकड़े को चीटियां न खा जाएं। कितना दर्दनाक होगा वह मंजर क्या आप सोच सकते हैं।

तमिलनाडु के तिरुनिंद्रावूर में यह दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सात साल के बच्चे सैमुअल की भूख से मौत हो गई। तीन दिनों तक बच्चे की मां सरस्वती उसकी लाश के पास बैठकर उसे पोछती रही ताकि उसके शव को चीटियां न लगें।

यह इलाका राज्य की राजधानी चेन्नै से महज कुछ ही दूरी पर है। बच्चे की मौत का मामला तब सामने आया जब सरस्वती के घर से पड़ोसियों को बदबू आनी शुरू हुई। पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस सरस्वती के घर पहुंची और बच्चे की लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। इंस्पेक्टर गुनासेकरन ने बताया कि वह दृश्य देखकर उनकी टीम भी दहल गई।

गुनासेकर ने बताया कि पुलिस टीम ने दरवाजा खटखटाया। सरस्वती ने दरवाजा खोला और पुलिस को बच्चे की लाश के पास तक ले गई। उसने पुलिस को बताया कि उसने अपने बेटे की लाश को थोड़ी देर के लिए भी नहीं छोड़ा क्योंकि उसे चीटियां खा सकती थीं। पुलिस ने बताया कि बच्चे का शरीर भूख के कारण कंकाल सा दिख रहा था।

पुलिस ने बताया कि उन लोगों ने सरस्वती के परिवार से बात की। उन लोगों ने बताया कि वह मानसिक रूप से बीमार है। सात साल पहले वह अपने पति जोस से अलग हो गई थी। वह सीटीएच रोड पर बने घर की दूसरी मंजिल पर रहती है जबकि पहली मंजिल और ग्राउंड फ्लोर पर उसके अन्य रिश्तेदार रहते हैं। लेकिन उसके बच्चे को कोई छीन न ले, इस वजह से वह ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखती थी।

सरस्वती पहले होम्योपैथी की डॉक्टर थी। उसका एक क्लिनिक था, वह लोगों का इलाज करती थी। पति से अलग होने के बाद उसकी मानसिक स्थिति खराब होने लगी। उसका रिश्तेदारों से प्रॉपर्टी को लेकर विवाद भी चल रहा था।

वह बेंगलुरु में रहने वाले अपने भाई से भी संपत्ति का केस लड़ रही है। वह अपने काम पर ध्यान नहीं दे पाती थी। लॉकडाउन के बाद सरस्वती का क्लिनिक बंद हो गया था। उसके पास खाने को भी नहीं बचा। बीते दो हफ्तों से सरस्वती अपने घर के अंदर ही बंद थी। उसने घर के दरवाजे नहीं खोले थे।

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