लोकतंत्र में कड़ा निर्णय वह होता है जिससे जनता को ज्यादा से ज्यादा फायदा हो


कृष्णकांत 
अर्थव्यवस्था की मौजूदा तबाही के बाद भारत की जनता को कड़े निर्णय की सनक से बाहर आ जाना चाहिए. नोटबंदी, आधी रात वाली जीएसटी और दुनिया का सबसे कड़ा लॉकडाउन, ये कड़े निर्णय थे जिन्होंने हमें 50 साल पीछे पहुंचा दिया.
कड़ा निर्णय वह भी था जब मनमोहन सिंह अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के लिए अड़ गए थे और उसी मुद्दे पर वामपंथी यूपीए से अलग हो गए. हालांकि, मनमोहन सिंह के उस निर्णय का भी विरोध किया गया था कि भारत अमेरिका का पिछलग्गू बन रहा है.
कड़ा निर्णय वह भी था जब जनता को राइट टू इन्फॉरमेशन दिया गया, राइट टू एजूकेशन और राइट टू फूड दिया गया. लेकिन उसमें शोर नहीं था. वह भी कड़ा निर्णय था जब मनरेगा जैसा कार्यक्रम लागू किया गया जिसमें करोड़ों गरीबों को रोजगार मिला. क्या मोदी सरकार ने जनता को ऐसा कोई एक अधिकार दिया? 
लोकतंत्र में कड़ा निर्णय वह होता है जिससे जनता को ज्यादा से ज्यादा फायदा हो. जिस निर्णय से जनता की बर्बादी हो, वह कड़ा निर्णय नहीं, तबाही का निर्णय है.

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