जानिए पिछले 5 साल से मोदी जी बिहारियों को कैसे उल्लू बना रहे हैं?


सौमित्र रॉय 

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने 2015 में बिहार के लिए 1.25 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। 5 साल गुजर गए। बिहार के किसी भी बीजेपी या जेडी-यू नेता से इसके बारे में पूछ लें, बगले झांकते नजर आएंगे। उनका कहना है कि चूंकि यह केंद्र प्रायोजित योजना है, इसलिए उन्हें नहीं मालूम कि कितना काम हुआ। झूठ बोल रहे हैं। 

पैकेज में 54,713 करोड़ सड़कों और पुलों के लिए था। 21,476 करोड़ पेट्रोलियम और गैस परियोजना और 1550 करोड़ कौशल विकास पर था। इससे बड़ा झूठ और कोई हो नहीं सकता कि आपके राज्य में सड़क बन जाए और आपको पता भी न चले। 

आपको बता दूं कि रोड और पुलों के काम को खुद बिहार सरकार ने ही 75 हिस्सों में ही बांटा था। उनमें से सिर्फ 13 ही पूरी हो सकी हैं। बाकी का पता नहीं। शायद 2025 का इंतज़ार है। 

2015 के पैकेज की घोषणा के बाद खुद नितीश कुमार ने उसकी आलोचना की थी। 2017 में तत्कालीन जल संसाधन मंत्री लल्लन सिंह ने विधानसभा में बताया था कि बिहार को पैकेज से 28,117 करोड़ ही मिले हैं। 

तब के वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले थे कि पैसा बजट से आएगा, लेकिन कब तक? इस सवाल पर चुप हो गए। पैकेज में गंगा पर 8 पुल बनने थे। बना सिर्फ एक-पटना हाजीपुर वाला। 

13 सितंबर को मोदी ने 3 पेट्रोलियम परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए 2015 के पैकेज की याद दिलाई, पर पटना में घर तक गैस पहुंचाने की बात छिपा गए, जो 2018 तक पूरी होनी थी। 

कोसी रेल महासेतु अटल बिहारी वाजपेयी सरकार का प्रोजेक्ट था। ऐसी कई परियोजनाएं हैं, जो पूरी नहीं हुईं। यानी मोदी 2015 से ही बिहार को मूर्ख बना रहे हैं। अब फिर उल्लू बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। 

इसका स्पष्ट प्रमाण यह है कि पीएम के विशेष आर्थिक पैकेज के लिए बजट में कोई शीर्ष बनाया ही नहीं गया। इस तरह के झूठे दावे अगर सड़क छाप पार्षद करे तो जमता है, पीएम को नहीं। कम से कम मन की बात में ही मोदी इसे स्वीकारें।


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