डिलीवरी के बाद अस्पताल की फीस नहीं दे पाया पिता तो डॉक्टर ने किया नवजात को नीलाम


आगरा। वर्तमान में डॉक्टरी ही एक ऐसा पेशा है, जिस पर लोग विश्वास करते हैं। डॉक्टर को लोग भगवान का रूप माना जाता है । कोरोना काल में इसे हर कोई जान भी गया है। कोरोना काल में चिकित्सक दिन रात ड्यूटी कर लोगों की सेवा में जुटे हैं। इससे चिकित्सकों के प्रति लोगों का और विश्वास बढ़ा है, लेकिन कुछ ऐसे भी डॉक्टर है जो डॉक्टर के नाम पर ही धब्बा है। एक डॉक्टर की दरिंदगी का मामला सामने आया है जो इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।

महज चंद रुपयों की खातिर भगवान का रूप कहे जाने वाले डॉक्टरो ने एक माँ को उसके नवजात बच्चे से जुदा कर दिया। ये पूरा मामला यूपी के जिले आगरा का है जहाँ एक डॉक्टर ने महिला से उसका नवजात छीनकर बेच दिया क्योंकि नवजात का पिता डिलीवरी की फीस नहीं चुका पाया।  घटना के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है और नवजात का पता लगाया जा रहा है।  कहा जा रहा है कि डॉक्टर ने अपने ही किसी रिश्तेदार को बच्चे को बेचा है। 

जानकारी के मुताबिक शंभु नगर निवासी शिव नारायण रिक्शा चालक है।  उसने बताया कि लॉकडाउन के कारण वह चार महीने से कर्ज लेकर घर का खर्च चला रहा है। 24 अगस्त को उसकी पत्नी बबिता को प्रसव पीड़ा हुई। शिव नारायण ने उसे पास के ही जेपी अस्पताल में भर्ती करा दिया। बबिता ने बेटे को जन्म दिया। 25 अगस्त को जब बबिता को डिस्चार्ज कराने की बारी आई तो अस्पताल ने 35,000 रुपये का बिल थमा दिया। रिक्शा चालक इतनी रकम चुकाने में असमर्थ था। उसके पास सिर्फ पांच सौ रुपये थे।

 गरीब दंपती 35 हजार रुपये शुल्क जमा नहीं कर सके तो डॉक्टर ने उनके नवजात बच्चे का ही सौदा कर दिया। दंपती का आरोप है कि चिकित्सक ने जबरन उनसे कागज पर अंगूठा लगवा लिया और बच्चा ले लिया। उधर महिला गिड़गिड़ाती रह गई, पति भी कुछ न कर सका क्योंकि पैसे न होने के कारण वो बेबस था। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की फीस न दे पाने पर चिकित्सक ने कहा कि रुपये नहीं हैं तो बच्चा देना पड़ेगा।

आरोप है कि अस्पताल की फीस न दे पाने पर चिकित्सक ने कहा कि रुपये नहीं हैं तो बच्चा देना पड़ेगा। इसके बाद दंपती से जबरन एक कागज पर अंगूठा लगवा लिया और नवजात लेकर 65 हजार रुपये देकर भगा दिया।  बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने बच्चे का सौदा एक लाख रुपये में कर दिया। 35 हजार रुपये अस्पताल का बकाया बिल जमा कराने के बाद पीड़ित रिक्शा चालक को 65 हजार रुपये देकर भगा दिया।

मामले की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त अस्पताल पर छापा मारा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के लिए अस्पताल के चार कमरों को सील कर दिया है। वहीँ इस संबंध में अस्पताल की संचालक सीमा गुप्ता का कहना है कि शिवचरण ने लिखित एग्रीमेंट करके बच्चे को गोद दिया है। अस्पताल ने सभी आरोपों को खारिज किया है।

उन्होंने कहा है कि बच्चे को दंपती ने छोड़ दिया था। उसे गोद लिया गया है, खरीदा या बेचा नहीं गया है। हम लोगों ने उन्हें बच्चे को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया। ट्रांस यमुना इलाके के जेपी अस्पताल की प्रबंधक सीमा गुप्ता ने कहा, ‘मेरे पास माता-पिता के हस्ताक्षर वाली लिखित समझौते की एक प्रति है। इसमें उन्हें खुद बच्चे को छोड़ने की इच्छा जाहिर की है।’

उधर, बाल अधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने कहा कि अस्पताल के स्पष्टीकरण से उनका अपराध नहीं कम होता। हर बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने निर्धारित की है। उसी प्रक्रिया के तहत ही बच्चे को गोद दिया और लिया जाना चाहिए। अस्पताल प्रशासन के पास जो लिखित समझौता है, उसका कोई मूल्य नहीं है। उन्होंने अपराध किया है।’

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर मिलने या बात करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में इस धांधली में अस्पताल की संलिप्पता से इंकार नहीं किया जा सकता है। अनियमिताएं मिलने पर अस्पताल को सील किया गया है। नवजात बच्चे को बेचने जाने की सूचना मिली है। इसकी जांच पुलिस करेगी। मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है।

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