मोदी सरकार ने जारी की विज्ञापनों के लिए नई गाइडलाइन


केंद्र सरकार ने विज्ञापनों के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी कर दी है और सभी स्टेकहोल्डर्स की टिप्पणियों के लिए उसे पब्लिक डोमेन में रखा है। कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत इन गाइडलाइन को जारी किया है।
मिनिस्ट्री ने 18 सितंबर तक इस पर सुझाव मांगे हैं।  इन गाइडलाइन के तहत विज्ञापन में लिखा डिस्क्लेमर छोटे अक्षरों में नहीं लिखा होना चाहिए और इसे किसी मुख्य जगह रखा जाएगा। विज्ञापन में डिस्क्लेमर सामान्य आईसाइट वाले व्यक्ति को एक ठीक दूरी और एक ठीक स्पीड से पढ़ने पर साफ दिखना चाहिए।
डिस्क्लेमर विज्ञापन में किए गए दावे की 'भाषा में' ही होना चाहिए और फॉन्ट भी दावे वाला ही इस्तेमाल हो। अगर दावा वॉइस ओवर में किया गया है तो डिस्क्लेमर भी वॉइस ओवर के साथ दिखाया जाना चाहिए। डिस्क्लेमर में दावे से संबंधित कोई जरूरी जानकारी छुपाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।  ऐसा होने पर विज्ञापन भ्रामक होगा।
डिस्क्लेमर में विज्ञापन में किए गए किसी भ्रामक दावे को सुधारने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अगर कंज्यूमर को खरीदारी के समय प्रोडक्ट या सर्विस की कीमत के अलावा डिलीवरी के दौरान कुछ पैसा देना है, तो विज्ञापन में प्रोडक्ट या सर्विस को 'फ्री' या 'बिना किसी चार्ज' के नहीं बता सकते।
विज्ञापनों के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन को सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) ने बनाया है. इस अथॉरिटी की स्थापना कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत हुई थी। गाइडलाइन के मुताबिक, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट जो कि ट्वीट, ब्लॉग या पोस्ट के जरिए किया जा रहा हो, वो पर्याप्त जानकारी या प्रोडक्ट/सर्विस के अनुभव के आधार पर होना चाहिए

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