बेरोज़गारों का गाना आया, देखकर रोना आया


रवीश कुमार 
किसी ने ये गाना भेजा है। मगधी ब्वायज़ ने बनाया है। इस गाने को देखकर और सुनकर अच्छा नहीं लगा। मन उदास हो गया। परीक्षाओं के इंतज़ार का दुख अब इनके ही मनोरंजन का साधन बन गया है। वे ख़ुद को हंसी के पात्र के रूप में देखने लगे हैं
यही बात मैंने जब NEET JEE की परीक्षा को लेकर ट्विटर पर हैशटैग आंदोलन चला तब कही थी। कहा था कि यह प्रदर्शनों का आरती काल है। नारों में न दुख की तीव्रता है न गानों में आर्तनाद। आरती काल है। बेरोज़गार सरकार के सामने आरती कर रहे हैं।
उनकी राजनीतिक चेतना समाप्त हो चुकी है। यह गाना बता रहा है कि उनके भीतर का विपक्ष ख़त्म हो चुका है। काश उन्हें इस उम्र में इन सब से नहीं गुजरना होता। बेरोज़गारी ने उन्हें दयनीय बना दिया है। क्या कर सकते हैं।
उम्मीद है बिहार की सरकार अपने भक्तों की आरती सुन लेगी। उसका ध्यान टूटेगा और बच्चों का कल्याण करेगी। बहुत पीड़ादायक है यह गाना। गाना किसने बनाया और गाया इसकी जानकारी नहीं है। होगी तो यहाँ बाद में लिख दूँगा।

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