लोगों का धंधा बंद कराके आप उनसे कहते हैं कि आत्मनिर्भर बनो?


कृष्णकांत 
निजी तौर पर मुझे इकोनॉमी की कोई समझ नहीं है. लेकिन केंद्र सरकार की आर्थिक योजनाएं के बारे में पढ़कर मुझे हंसी छूट जाती है. अभी एक खबर पढ़ी कि मोदी सरकार ग्लोबल फर्म्स को भारत लाने के लिए पैकेज घोषित करने की योजना बना रही है. मेक इन इंडिया के तहत विदेशी फर्मों को भारत लाने के लिए सरकार 1.68 लाख करोड़ का ऐलान करेगी.
एक दूसरा डेटा देखिए कि अकेले नोएडा में 5000 से ज्यादा छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं. देश भर में इनकी संख्या लाखों में होगी. पूरे देश का उद्योग चौपट करके अगर आप दो चार बड़ी कंपनियां भारत ले भी आए तो उससे क्या बदल जाएगा? कुछ कंपनियां भारत आएंगी तो कुछ हजार लोगों को काम मिलेगा. लेकिन फिलहाल जो बंद पड़ा है, उसमें लाखों लोगों का रोजगार था.
भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है छोटे और मध्यम उद्योग, जिनके तहत बहुसंख्यक कामगार आबादी रोजी कमाती है. ये इं​डस्ट्री नोटबंदी के बाद से ही बर्बादी का सामना कर रही है. उसे पुनर्जीवित करके आप अर्थव्यवस्था को बचा सकते थे.
लोगों का धंधा बंद कराके आप उनसे कहेंगे कि आत्मनिर्भर बनो तो कैसे होगा? अब सोचिए कि ऐसी विध्वंसक नीतियां बनाने वाली सरकार के बारे में वे अर्थशास्त्री क्या सोचते होंगे जिनको सच में आर्थिकी की समझ है? इसी​लिए कई अर्थशास्त्री इस सरकार में पद छोड़कर चले गए.

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