बीजेपी की ताकत नहीं बढ़ी है बस विपक्ष नदारद हैं?



- शिवम शंकर सिंह ( बीजेपी नेता राम माधव के पूर्व सहयोगी)

मैं तो यही कह सकता हूं कि बीजेपी ने पिछले दो सालों में व्यवस्था के भीतर अधिक घुसपैठ कर ली है. शुरू में बीजेपी सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी थी. अब यह मामला नहीं है. अब वह केवल एक राजनीतिक पार्टी [होने] से आगे बढ़ गई है. न्यायपालिका जिस तरह के फैसले सुना रही है उससे आपको अंततः जो देखने को मिलता है वह यह है कि एक राजनीतिक दल ने देश को अपने कब्जे में कर लिया है.

न्यायपालिका, बीजेपी के अंदर और बाहर, मीडिया द्वारा घुटने टेक देने की परिघटना नई है. यह 2019 के बाद की परिघटना है. अगर आप कोरोनोवायरस के हालात को देखें, जिस तरह से यह सब घट रहा है, मोदी जी की जिस तरह की फैन फॉलोइंग है, वह एक राजनीतिक पार्टी की बजाए एक कल्ट की तरह है.

दिल्ली के दंगों के संबंध में आप देखें जो हो रहा है, जिस तरह के लोग गिरफ्तार किए गए हैं, हर कोई अच्छे से समझता है कि क्या हो रहा है. कोई भी यह नहीं सोचता है कि छात्रों को गिरफ्तार करना, सड़कों पर विरोध कर रहे लोगों को गिरफ्तार करना, उन्हें तीन महीने के लिए जेल भेज देना ठीक बात है.

सबको पता था कि जो हो रहा है वह गलत है. बहुत सारे लोग, यहां तक कि बीजेपी के भीतर भी, यह समझते हैं कि चुन-चुन कर शिकार बनाया जा रहा है. लेकिन मसला यह है कि इस एकदम साफ चीज के लिए भी, इसके खिलाफ कोई वास्तविक सार्वजनिक गुस्सा नहीं है. विपक्ष वास्तव में बहुत कुछ नहीं कर सकता था. 

आम आदमी पार्टी ने कुछ नहीं कहा, कांग्रेस ने कुछ नहीं कहा. मीडिया ने वास्तव में कोई परवाह नहीं की कि किसे गिरफ्तार किया जा रहा है. सफूरा जरगर गर्भवती थीं, इसलिए (मीडिया में) एक-दो दिनों के लिए उनका मामला चला कि एक गर्भवती महिला जेल में है.

लेकिन एक गर्भवती महिला से परे, तर्क यह होना चाहिए कि लोगों ने सरकार के खिलाफ विरोध किया और अब उन्हें दंगे में फंसाया जा रहा है. लेकिन कोई भी यह तर्क नहीं दे रहा है. इसलिए मैं कहूंगा कि बीजेपी अब भी वैसी ही है जैसी पहले थी. अच्छा, बुरा और बेहुदा वास्तव में इतना नहीं बदला है. यह वैसी ही है जैसी थी. बस दूसरा पक्ष अब पूरी तरह से गायब हो गया है.


Post a Comment

0 Comments