मोदी सरकार ने रेल कंपनियों को दी आजादी, निजी ट्रेनों का किराया खुद तय करेंगी कंपनी

नई दिल्ली: निजी ट्रेनों का संचालन करने वाली कंपनियां अपने स्तर पर ही रेल किराया तय करेंगी। इसमें सरकार की ओर से कोई दखल नहीं दिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के इस फैसले का विरोध भी देखने को मिल सकता है। खासतौर पर गरीब तबके की बड़ी आबादी आवाजाही के लिए ट्रेनों पर निर्भर रही है।
ऐसे में रेलवे का निजीकरण और किराया तय करने की स्वतंत्रता कंपनियों को मिलने से यह वर्ग प्रभावित हो सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने निजी ट्रेनों के संचालन के लिए आवेदन मांगे हैं। प्राइवेट ट्रेनों को चलाने के लिए जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर, अडानी इंटरप्राइजेज, बॉम्बार्डियर, एल्सटम समेत कई दिग्गज कंपनियों ने रुचि जताई है। रेल मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक अगले 5 सालों में रेलवे में 7.5 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है।
तो वही एक अधिकारी ने बताया कि अधिकतम किराए की सीमा तय नहीं होने के कारण और लागत को देखते हुए किराया मौजूदा ट्रेन सेवाओं की तुलना में ज्यादा होने की उम्मीद है। निजी ऑपरेटर्स अपनी वेबसाइट के द्वारा भी टिकट बेच सकेंगे लेकिन उनकी वेबसाइट को पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम से जुड़ा होना जरुरी होगा।1
09 रूटों पर चलेंगी 151 निजी ट्रेनें: सरकार ने जुलाई में 109 रूटों पर 151 निजी ट्रेनों के संचालन के लिए आवेदन मंगाए थे। इसके अलावा दिल्ली और मुंबई रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का भी ठेका दिया जाएगा। बता दें कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण के ठेके की रेस में भी अडानी ग्रुप की कंपनी शामिल हैं।
दरअसल निजी ट्रेनों के संचालन के लिए प्राइवेट कंपनियों को आकर्षित करने के मकसद से सरकार ने यह फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने इस बारे में बताते हुए कहा है कि निजी कंपनियों को स्वतंत्रता दी जाएगी कि वे अपने तरीके से ट्रेनों का किराया तय कर सकें।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यादव ने कहा कि इन रूटों पर एसी बसों और विमानों का पहले ही संचालन हो रहा है, ऐसे में उन्हें किराये की दरें तय करने से पहले इस बात का भी ध्यान रखना होगा। ऑस्ट्रेलिया की कुल आबादी के बराबर लोग भारत में हर दिन ट्रेन यात्रा करते रहे हैं। यहां ट्रेनों का किराया हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

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