चीन को ऐसे जवाब दें !


ध्रुव गुप्त 
अरुणाचल प्रदेश से चीन की सेना द्वारा पांच लोगों के अपहरण के आरोप के जवाब में  चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अरुणाचल भारत का नहीं, चीन के दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है।
और यह कि चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को भारतीय भूमि के तौर पर मान्यता नहीं दी है। अब इस देश की जनता का अपनी सरकार से यह सवाल तो बनता ही है कि वह कब तक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तौर पर एक स्वतंत्र देश तिब्बत पर विस्तारवादी चीन के अवैध कब्जे को मान्यता देती रहेगी ?
क्या वक़्त नहीं आ गया है कि तिब्बत के संबंध में पिछले सात दशकों से चली आ रही नीति पर पुनर्विचार कर तिब्बत को एक स्वतंत्र देश के तौर पर स्वीकार करते हुए धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार को मान्यता दे दी जाय ?
अभी दुनिया भर में जैसा चीन-विरोधी माहौल है उसमें बहुत संभव है कि भारत के सामने आते ही दुनिया के कई और देश भी तिब्बत की निर्वासित सरकार को मान्यता देने के लिए आगे आएं। ऐसा करने से भारत में निर्वासन भोग रहे लाखों तिब्बती शरणार्थियों की चिरलंबित मांग पूरी होगी और लंपट चीन को एक बड़ा झटका भी लगेगा।
अगर सरकार देश की मीडिया की तरह यह सोच रही है कि उसकी ज़ुबानी चेतावनियों और सीमा पर राफेल की तैनाती से विस्तारवादी चीन डर कर मैदान छोड़ देगा तो यह दिवास्वप्न जैसा है। दुनिया के सामने तिब्बत का दबा मामला सामने लाकर चीन को उसी की भाषा में जवाब देने और उसपर बढ़त लेने का यह सबसे उपयुक्त अवसर है।

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