चरित्रहंता मीडिया की भीड़ में अकेली !


ध्रुव गुप्त 
रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ सुशांत मामले में अबतक कुछ भी प्रमाणित नहीं हुआ है सिवा सुशांत या अपने लिए कुछ ग्राम या कुछ पुड़िया ड्रग मंगवाने के। उसके विरुद्ध ड्रग का यह मामला भी न्यायालय में नहीं ठहरेगा क्योंकि उसके पास से कोई ड्रग बरामद नहीं हुआ है।
नारकोटिक्स एक्ट के मामले व्हाट्सएप चैट के आधार पर खड़े नहीं रह सकते। एन.सी.बी की यह कार्रवाई सिर्फ मीडिया के दबाव में अपनी साख बचाने के लिए हो रही है, वरना ईमानदारी से अगर खोजा जाय तो बॉलीवुड ही नहीं, तमाम शो बिज़नेस के नब्बे प्रतिशत लोग ड्रग एडिक्ट और राजनीति तथा समाज के बहुत बड़े-बड़े लोग इस धंधे में लिप्त पाए जाएंगे।
रिया के खिलाफ सुशांत को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने या उसकी हत्या करने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के भी नहीं। न्यायोचित तो यह था कि यह मामला जांच एजेंसियों के विवेक पर छोड़कर हमें प्रतीक्षा करनी चाहिए थी।
एक अप्रमाणित मामले में सिर्फ अनुमान के आधार पर देश की लगभग तमाम मीडिया जिस तरह से एक अकेली लड़की के पीछे पड़ी है और लगातार चरित्र-हनन किये जा रही है, वह भारतीय मीडिया के इतिहास का शायद सबसे काला अध्याय है। न्यूज़ चैनल खोलिए तो लगता है कि देश की सबसे बड़ी समस्या रिया है और उसके गिरफ्तार होते ही देश की बाकी समस्याएं स्वतः सुलझ जाएगी।
उससे भी विचित्र बात यह है कि देश का एक बड़ा तबका रस लेकर रिया के इस मीडिया ट्रायल को देख रहा है और न्यूज चैनलों के टी.आर.पी को उछाल भी दे रहा है।
मैं नहीं जानता कि सुशांत मामले में रिया दोषी है या नहीं। दोषी साबित होगी तो मैं भी उसकी भर्त्सना करूंगा। फिलहाल जिस तरह से यह अकेली लड़की मीडिया के चौतरफ़ा हमलों के बीच बहादुरी से खड़ी और जिंदा भी है,उसके लिए उसे मेरा सलाम !

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