सत्तारूढ़ दल के जिन नेताओं, मंत्रियों, विधायकों को कोरोना हुआ क्या वे भी जमात में गए थे?


वसीम अकरम त्यागी 

राज्यसभा में विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24-25 फरवरी को गुजरात में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम के लिए भारत दौरे पर आए थे, तब कोविड-19 जांच अनिवार्य नहीं थी। भारत के सभी हवाई अड्डों पर आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अनिवार्य जांच चार मार्च से शुरू की गई थी। 

यही सरकार ने कोरोना फैलने के बारे में संसद में कहा है कि तब्लीग़ी जमात के कार्यक्रम के कारण कईयों को कोरोना हुआ है। गांव में एक कहावत है कि भैंस को अपना रंग नहीं दिखता, लेकिन छतरी को देखकर बिदक जाती है। विदेश मंत्री ने 24-25 फरवरी तक कोविड जांच अनिवार्य न बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। सवाल यह है कि तत्कालीन परिस्थितियों में भारत के हवाई अड्डों पर कोविड जांच को अनिवार्य करने का आदेश कौन देता? 

कौन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच करने के आदेश देता? भारत सरकार ही तो देती, या ये काम भी ट्रंप करते? लेकिन सरकार ने बहुत ही चालाकी से खुद का दामन बचा लिया और कोरोना का ठीकरा तब्लीग़ी जमात के बहाने मुसलमानों के सर पर फोड़ दिया। मुसलमान न सिर्फ इस सरकार की बल्कि मीडिया, देश के सिस्टम की वह खुराक है जिस पर आरोप मढकर बड़ी से बड़ी गलतियों, निकम्मेपन को बहुत आसानी से छिपा लिया जाता है। 

हद तो यह है कि सरकार द्वारा कोरोना फैलने का ठीकरा ऐसे समय में तब्लीग़ी जमात पर फोड़ा गया है जब सत्तारूढ़ दल के कई नेता, मंत्री, विधायक कोरोना की चपेट में आए हैं, कईयों ने कोरोना में जान गंवाई है। लेकिन इसके बावजूद अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए तब्दीलीगी जमात के सर पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। 

जब सरकार संसद में बताती है कि तब्लीगी जमात के कारण कोरोना फैला तब अपने उसूलों के उलट जाकर यह पूछना ही पड़ता है कि सत्तारूढ़ दल के जिन नेताओं, मंत्रियों, विधायकों को कोरोना हुआ क्या वे भी जमात में गए थे? जिन्होंने कोरोना में जान गंवाई वे किस जमात में गए थे?


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