कैदी ने गुप्तांग में छिपा रखा था मोबाइल, डॉक्टरों ने इस तरह किया मोबाइल निकालने का प्रयास

जोधपुर। राजस्थान के कुख्यात बदमाशों का अंतिम ठिकाना कही जाने वाली जोधपुर सेंट्रल जेल में मोबाइल तस्करी का एक अनूठा मामला सामने आया है।
जेल से गैंग संचालन के आरोपों वाली इस जेल में सलाखों के पीछे मोबाइल फोन सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है लेकिन अभी तक ये पता नहीं लग पाया था कि ये फोन आखिर जेल में पहुंचते कैसे हैं? लेकिन शुक्रवार को जेल में पकड़ी गई मोबाइल तस्करी का ये मामला चौंकाने वाला है।
एक कैदी जेल में मोबाइल लेकर पहुंचा और किसी को भनक तक नहीं लगी। उसकी पोल तब खुली जब वह खुद दर्द से कराहने लगा। दरअसल, कैदी ने मोबाइल अपने गुप्तांग में छिपा रखा था। मोबाइल फोन ज्यादा देर रेक्टम (मलाशय) मे रखने से उसकी तबीयत बिगड़ गई।
आनन-फानन में जेल प्रशासन को उसे शहर के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि वहां भी कैदी के शरीर से मोबाइल नहीं निकाल जा सका तो उसे मथुरादास माथुर अस्पताल शिफ्ट किया गया है।
जेल सूत्रों के अनुसार कैदी की तबियत बिगड़ने के बाद उसे तत्काल महात्मा गांधी अस्तपाल पहुंचा गया। जेल के सुरक्षा प्रहरियों की मौजूदगी में उसका इलाज कराया गया।
अस्पताल के चिकित्सकों मोबाइल गुप्तांग से बाहर निकालने की कोशिश कीं लेकिन सफल नहीं हुए। ऐसे में तत्काल कैदी को संभाग के सबसे बड़े अस्पताल मथुरा दास माथुर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
फिलहाल जेल प्रशासन इस मामले में कुछ भी कैमरे के सामने बोल नहीं रहे हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो जेल में रसद सामग्री की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार के मार्फत से यह मोबाइल जेल तक पहुंच रहे थे।
शुक्रवार को ठेकेदार ने कैदी देवाराम को कुछ मोबाइल दिए थे। जिसे उसने अपने गुप्तांग में डाल दिया था जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां उसका इलाज जारी है। सूत्रों की मानें तो जेल प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

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