शिवसेना को किसी की भी ललकार पसंद नहीं है, सरकार रहे न रहे पर सम्मान में कमी नहीं आनी चाहिए


अरमान आसिफ इकबाल 
वक़्त पर जाकर शरद यादव ने शिवसेना के गुस्से को संभाला और उद्धव ठाकरे को समझाया कि वो गांधीजी के तीन बंदरों की तरह आंख, कान, मुंह सब बंद कर लें...विपक्षी शिवसेना की कमजोरी अच्छी तरह जानते हैं...शिवसेना को किसी की भी ललकार पसंद नहीं है....सरकार रहे न रहे पर सम्मान में कमी नहीं आनी चाहिए...
शिवसेना ने कंगना को सबक़ सिखाने का पूरा मन बना लिया था, भले ही उसकी कितनी आलोचना हो या सरकार चली जाए...शरद पवार को लगा कि भाई इन दोनों की लड़ाई में अपनी मलाई चली जाएगी...तुरंत उद्धव से मिले और सब्र से काम लेने की हिदायत दी...
अब देखना होगा कि कंगना की ललकारने की हद तू-तड़ाक, पीओके, पाकिस्तान,बाबर, राम मंदिर, कश्मीरी पंडित से कितनी आगे जाती है और शिवसेना कब तक गांधीजी का बंदर बनी रहती है...इस वक़्त कंगना डॉन फ़िल्म की अमिताभ बच्चन हैं और शिवसेना की हालत शेट्टी की तरह है जो एक ही पुलिस वैन में सवार हैं...याद है न वो डायलॉग...अबे ओ गंजे...ये आंखें किसी और को दिखाना...😃😃😃

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