मरीजों की जिंदगी बचाना ही हमारी जिंदगी का मकसद है?


मोहम्मद आसिफ 
अमरोहा जनपद में एंबुलेंस कर्मचारियों की सेवा देश के वीर सैनिकों से कम नहीं है यह लोग समाज सेवा भी करते हैं और अपनी ड्यूटी को इतने कम मेहनताने में अंजाम देते हैं के एक मजदूर भी इनसे अच्छे पैसे कमाता है मगर उसके बावजूद उनके माथे पर शिकन तक नहीं आती
108 एंबुलेंस के अमरोहा जनपद के कंपनी की ओर से प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम करने वाले मोहित चौधरी बताते हैं कि उनकी टीम पूरी मेहनत और लगन के साथ इस को रोना काल में मरीजों की सेवा में लगी है
यह लोग अपनी ड्यूटी के सामने अपने परिवार को भी तर्ज़ नहीं देते उनका कहना है कि इनके लिए सबसे पहले ड्यूटी है और मरीज की जान बचाना है और उनके सामने तन्खाह भी मायने नहीं रखती यह लोग बहुत कम मेहनताने ने में समाज की सेवा करते हैं
108 एंबुलेंस परी काम करने वाले कर्मचारी जिसको हम लोग एंबुलेंस के पायलट के नाम से जानते हैं उनका कहना है कि एक मजदूर जितने पैसे कमाता है उससे भी कम पैसे इनको मिलते हैं लेकिन इन लोगों के लिए पैसे मायने नहीं रखते इंसानी जिंदगी बचाना इनके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है यह लोग अपने कंपनी सरकार और अपने बॉस के आदेशों का पालन करते हुए सबसे पहले इंसान जिंदगी को बचाने का काम करते हैं
उसके लिए चाहे इन्हें अपना खाना था क्यों ना छोड़ना पड़े कॉल आते ही यह लोग समय रहते मौके पर पहुंचते हैं और जिंदगी और मौत के बीच में जंग लड़ने वाले की जान बचाने का काम करते हैं उन्होंने कहा कि हमारी सेवा किसी को दिखाई नहीं देती लेकिन हमारी सेवा के रूप में हम पारिश्रमिक कम पाते हैं मगर हमारे दिल को सुकून मिलता है

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