मोदी राज में हर इंसान एक चलता-फिरता ATM (ऑटोमेटिक टैक्स मशीन) बन गया है?


सौमित्र रॉय 

मोदी राज में हर इंसान एक चलता-फिरता एटीएम (ऑटोमेटिक टैक्स मशीन) है। जब तक टैक्स भर रहे हैं, सरकारी आंकड़ों में ज़िंदा हैं। आपने सुना होगा कि इस टैक्स से देश चलता है, विकास होता है। 

यह नहीं सुना होगा कि सरकार टैक्स की रकम दबा भी जाती है। टैक्स के पैसे से कोई और काम होता है। फिर सरकार संसद में झूठ बोलती है। मोदी राज में सब मुमकिन है। 

कैग यानी CAG ने इस महाझूठ से बुधवार को पर्दा उठाया है। संसद सत्र के आखिरी दिन। रिपोर्ट रखी, बात खत्म- गोबर पट्टी के गुबरैले कीड़े जैसे ज़्यादातर पत्रकारों के लिए ये खानापूर्ति है। बिना पैसे के नहीं छापेंगे। अलबत्ता, इंडियन एक्सप्रेस ने छापा है। मोदी सरकार ने 2017-2019 के बीच GST सेस का 47272 करोड़ दबा लिया। 

ऐसा करके सरकार ने अपने ही बनाये GST कंपनसेशन सेस एक्ट 2017 का उल्लंघन किया। ये पैसा GST कंपनसेशन फण्ड में जाना चाहिए था, लेकिन कहीं और चला गया। यह पैसा राज्यों को मिलना चाहिए था, लेकिन गया कंसोलिडेटेड फण्ड में। 

18 सितंबर को लोकसभा में वित्त मंत्री पूरक मांग के जवाब में बोल रही थीं- सेस के द्वारा जितना कंपनसेशन कलेक्ट होता है, वो होता है कंपनसेशन, जो राज्यों को देना होता है। अगर सेस कलेक्शन में कुछ नहीं है तो नहीं है। 

अब कैग की रिपोर्ट में घोटाला सामने आने के बाद मोदी सरकार कह रही है- ठीक है। अगले साल दे देंगे। लेकिन इसके लिए भी तो संसद की अनुमति चाहिए? मोदी सरकार सीना तानकर कह सकती है कि संसद से भी ठप्पा लगवा लेंगे। 

एक बात और। कैग ने पाया है कि देश की 136 करोड़ आबादी पर लगाए गए 35 तरह के सेस से 2018-19 में मिले 2,74,592 करोड़ में से 1,64,322 करोड़ रिज़र्व फण्ड में डाले गए। 

साफ है कि सरकार जिस काम के लिए सेस ले रही है, उस काम के बजाय दीगर काम में खर्च हो रहा है। किन दीगर कामों में? अजी, बिहार में चुनाव की घोषणा हो चुकी है। समझ जाएंगे।


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