शर्म मोदी सरकार को नहीं, आपको आनी चाहिए


सौमित्र रॉय 

1977 में आई फिल्म अमर अकबर एंथनी में एंथनी का खोली नंबर 420 था। परदे पर एक गाने में वह एक विचित्र बात अंग्रेजी में कहता है- “You see the whole country of the system is juxtapositioned by the haemoglobin in the atmosphere, because you are a sophisticated rhetorician intoxicated by the exuberance of your own verbosity.”

43 साल बाद उससे भी बड़े एक एक्टर ने 19 जून को देश को बताया,  ‘न वहां कोई हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है। न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है’। 16 सितंबर को जूनियर गृह मंत्री नित्यानंद राय जी बोले, ‘भारत-चीन बॉर्डर पर पिछले 6 माह में कोई घुसपैठ नहीं हुई।

चीन के मामले में भारत की संसद में इस तरह का बेतुका बयान एलएसी को लेकर चीन के 1959 के दावे को मजबूती देता है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा से बिल्कुल अलग है। अब चीन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत सरकार के इन बयानों को आधार बनाकर अपना हित साध सकता है।

मोदी सरकार के ये बयान चीन समर्थित बैंक एआईआईबी से लिए गए 9000 करोड़ रुपए के लोन का दबाव हो न हो, लेकिन दुनियाभर में हंसी का पात्र बनने के बाद कल देर शाम गृह मंत्रालय के नौकरशाह घुसपैठ और अतिक्रमण में अंतर समझाने में जुटे थे।

जैसा कि मैंने कल देर शाम को लिखा था कि यह सब-कुछ केवल प्रधानमंत्री मोदी को बचाने के लिए हो रहा है। अब मोदी यह दावा कर सकते हैं कि मैंने तो घुसपैठ की बात कही थी, अतिक्रमण की नहीं।

अब हां एक और शब्द आता है, जो विदेश मंत्रालय के बयानों में बार-बार आया है- लांघना। यानी सीमा लांघना। मई की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज में कहा गया था कि चीन ने भारत की सीमा लांघी है। मोदी के 19 जून के बयान के बाद वह दस्तावेज चोरी से हटा लिया गया।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी कहते हैं, घुसपैठ आतंकवादी करते हैंहैं। यह सीमा लांघने और अतिक्रमण से बिल्कुल अलग है। जिस देश की सरकार को इन तीनों शब्दों की बारीकी का नहीं पता, उसे आपने देश चालाने की बागडोर सौंपी है। शर्म मोदी सरकार को नहीं, आपको आनी चाहिए।


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