भोपाल पुलिस ने इंद्रेश बहादुर सिंह की हत्या का किया सनसनीखेज खुलासा।। Raebareli news ।।

  


जिसको काम दिलाने के लिए बुलाया, उसी आदमी ने इंद्रेश बहादुर सिंह को उतारा मौत के घाट, इस जमाने में भरोसा करें, तो किस पर करें?

शिवाकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के पूरे हनुमंत सिंह मजरे ताजुद्दीनपुर के रहने वाले ट्रक ड्राइवर इंद्रेश बहादुर सिंह की मध्यप्रदेश के भोपाल जिले में हुई निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने छानबीन कर खुलासा कर दिया है। कातिल कोई और नहीं, जिसे रोजी रोटी दिलाने के लिए एक हफ्ते पहले मृतक ने अपने पैतृक गांव के बगल के मुरैनी गांव से भोपाल बुलाया था, उसी ने ट्रक पर रहने वाली लोहे की रॉड से पीट-पीटकर इंद्रेश बहादुर की हत्या कर दी, और अनजान बनकर हत्या करने के बाद ट्रक में सो गया। यह  जानकारी मृतक के चचेरे भाई ने वापस लौट कर यहां पत्रकारों को दी है। मध्य प्रदेश की रायसेन जिले के थाना सलामतपुर पुलिस ने हत्यारोपी प्रदीप सिंह उर्फ दीपू को गिरफ्तार कर लिया है।


    आपको बता दें कि, महराजगंज थाना क्षेत्र के गांव पूरे हनुमंत सिंह मजरे ताजुद्दीनपुर के रहने वाले विद्यासागर सिंह का पुत्र इंद्रेश बहादुर सिंह करीब 25 साल पहले मध्यप्रदेश के भोपाल शहर चला गया था, और वहां वह एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में ट्रक ड्राइवरी का काम करता था। पिछले दिनों वह छुट्टी लेकर घर भी आया था, तभी यहां उसके तथाकथित मित्र गांव मुरैनी थाना महराजगंज जनपद रायबरेली के प्रदीप सिंह उर्फ दीपू ने उनसे हाथ पैर जोड़कर अपने साथ नौकरी दिलाने की मिन्नत की थी। 

     बताते हैं कि, विगत 1 सप्ताह पूर्व ही मृतक इंद्रेश बहादुर सिंह ने प्रदीप सिंह उर्फ दीपू को भोपाल बुलाकर ट्रक ड्राइवरी का काम दिला दिया था। मृतक के साथ जनपद फतेहपुर का अनिल गुप्ता भी ट्रक ड्राइवरी का काम उसी ट्रांसपोर्ट में करता था। जहां मृतक ने प्रदीप सिंह उर्फ दीपू को अपने साथ लगवाया था।


     विगत शुक्रवार को अनिल गुप्ता ने यहां टेलीफोन से मृतक के परिजनों को सूचना दी थी, कि इंद्रेश बहादुर सिंह का कत्ल हो गया है। इसके पश्चात यहां से मृतक के परिजन भोपाल पहुंचे थे। वहां से लौटने के बाद अमित कुमार सिंह ने पत्रकारों को बताया कि, पुलिस को जांच के दौरान पता चला है कि, शराब के नशे में प्रदीप सिंह उर्फ दीपू का इंद्रेश बहादुर सिंह से झगड़ा हुआ था, और उस रात के समय प्रदीप सिंह ने ट्रक पर रखी लोहे की रॉड निकालकर ताबड़तोड़ 5 बार इंद्रेश बहादुर सिंह पर प्रहार किए थे। सिर में गहरी चोट लग जाने के कारण इंद्रेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी।

     उधर इंद्रेश की हत्या करने के बाद रक्तरंजित कपड़ों को धुल कर हत्यारा प्रदीप सिंह उर्फ दीपू अपने ट्रक में जाकर सो गया था। उधर अनिल गुप्ता ने जब इंद्रेश सिंह को मृत दशा में देखा, और पुलिस को सूचना दी, तो पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी थी। इस बीच पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान प्रदीप सिंह उर्फ दीपू असहज दिखा, और वहां से भागने की कोशिश की, तो पुलिस ने उसे पकड़कर कड़ाई से पूछताछ की। तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। यही नहीं प्रदीप सिंह के वह कपड़े भी पुलिस को मिल गए जिसको पहनकर उसने इंद्रेश बहादुर सिंह की हत्या की थी, और कपड़ों से रक्त की छींटे मिटाने का बहुत प्रयास किया था। लेकिन धब्बे पूरी तरह मिटे नहीं थे।

    इसी क्रम में पुलिस को प्रदीप सिंह उर्फ दीपू के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त की गई लोहे की रॉड भी बरामद हो गई है। बकौल अमित सिंह पुलिस ने आरोपी प्रदीप सिंह उर्फ दीपू को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है। क्षेत्र भर में घटना के पर्दाफाश होने के बाद इस बात को लेकर चर्चा है कि, जिसको काम दिलाने के लिए बुलाया, उसी आदमी ने इंद्रेश बहादुर सिंह को मौत के घाट उतार दिया, इस जमाने में भरोसा करें, तो किस पर करें?

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