कुएं में पड़ी भांग, हाशिए पर चंद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अध्यापक।। Raebareli news ।।

  


शिवाकांत अवस्थी

बछरावां/रायबरेली: सरकारी विभागों में सबसे ज्यादा वेतन शिक्षा विभाग के गुरुजनों को दिया जाता है, और सभी जानते हैं कि, अगर चंद अध्यापकों को छोड़ दिया जाए तो बाकी के गुरु जन कितना अपने फर्ज का पालन करते हैं यह सर्व विदित है। यह गुरु जन कब स्कूल आएंगे, कब जाएंगे और कब अवकाश ले लेंगे, कोई पता ठिकाना नहीं रहता। ऐसा ही एक नजारा  बछरावां विकास खंड की ग्राम सभा समोदा के विद्यालय रुस्तम खेड़ा गजियापुर में देखने को मिला। जहां 10:44 तक कोई भी अध्यापक विद्यालय नहीं पहुंचा था। विद्यालय में पूरी तरह ताला बंद मिला। परिसर के अंदर भोजन बनाने वाली जरूर मौजूद थी।

    आपको बता दें कि, जानकारी करने पर पता चला कि, इस विद्यालय में दो अध्यापकों की तैनाती है। जिनमें प्रधानाध्यापक अनिल कुमार पिछले 3 दिनों से गायब है अथवा अवकाश पर हैं या फिर ऐसे ही स्कूल से गायब हैं ज्ञात नहीं हो पाया। हाँ ग्रामीणों ने यह जरुर बताया कि, सहायक अध्यापिका अंजू भाटिया देर सवेर विद्यालय आती है, और रजिस्टर में हाजिरी भर कर समय से पहले चली जाती है। किंतु आज वह भी अनुपस्थित मिली। भोजन बनाने वाली एक महिला ने बताया कि, मैडम का फोन आया था उन्होंने कहा है कि, आज अनिल सर! आएंगे, परंतु अभी तक नहीं आए।


     इस संदर्भ में जब इस संवाददाता ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से टेलीफोन नंबर पर बात की, तो उन्होंने बताया कि, समस्त अध्यापकों को समय से ही स्कूल खोलने और बंद करने का आदेश है, बच्चों को कोविड-19  के दृष्टिगत अवकाश दिया गया है। बिना सूचना गैरहाजिर अध्यापकों पर उन्होंने तत्काल कार्यवाही की बात कही है, इस संदर्भ में ग्रामीणों ने बताया कि, विद्यालय में अध्यापक कब आएंगे कब जाएंगे कोई पता नहीं। यह भी सर्वविदित है कि, लखनऊ व रायबरेली से आने वाले  अधिकांश अध्यापक व अध्यापिकाऎ धनबल अथवा राजनैतिक दबाव  का फायदा उठाकर बछरावां विकासखंड में ही तैनात है। कुछ अध्यापक व अध्यापिकाऎ ऐसे भी हैं, जो रहने वाले तो बछरावां क्षेत्र के ही हैं किंतु रहते लखनऊ और रायबरेली में है। 

    नाम ना छापने की शर्त पर अभिभावकों का आरोप है कि, मौजूदा खंड शिक्षाधिकारी के कार्यकाल में बछरावां विकास खंड क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अगर निष्पक्ष जांच की जाए, तो लगभग 70 फीसदी विद्यालय ऐसे मिलेंगे, जहां विद्यालयों के खोलने और बंद करने की सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही है। परंतु सवाल यह उठता है कि, ऐसा करेगा कौन? क्योंकि शिक्षा विभाग एक ऐसा विभाग है, जहां पूरे कुएं में भांग पड़ी है, अगर चंद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अध्यापक है भी, तो हाशिए पर हैं।

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