यूपी SSF की तरह तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने 1938 में शुज़ स्टाफ (SS) का गठन किया था...


सौमित्र रॉय 
दूसरे विश्व युद्ध से ठीक पहले की बात है। तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने 1938 में शुज़ स्टाफ (एसएस) का गठन किया। हिटलर ने जर्मनी के तमाम स्थानों से ढूंढ-ढूंढकर हत्यारों, बलात्कारियों, अपराधियों की फौज बनाई। इसे एसएस नाम दिया गया। बाद में यह फौज डेथ स्क्वॉड के नाम से कुख्यात हुई।
इस फौज का एक ही काम था- यहूदियों को चुन-चुनकर मारना। हिटलर की यह फौज पुलिस वालों के साथ मिलकर काम करती थी। राजनीतिक विरोधियों को बिना बात के सीधे गोली मारी जाती थी।
बाबी यार और रुम्बुला हत्याकांडों में दो दिन के भीतर लगभग 60 हजार यहूदियों का कत्लेआम किया गया। यूपी में यही इतिहास फिर दोहराया जा रहा है। वहां एसएस की जगह एसएसएफ बन रही है।
फिलहाल, वहां ब्राम्हणों को गोली मारने का चलन है। एसएसएफ बिना सवाल-जवाब किए, बिना वारंट के किसी को भी उठाएगी और... इसके अधिकार कानून से भी ऊपर होंगे, क्योंकि अदालत भी सरकार की अनुमति के बगैर एसएसएफ की किसी भी कार्रवाई का संज्ञान नहीं ले सकेगी।
सरकार कह रही है कि यह सब इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर हो रहा है। इस हस्यास्पद दलील पर मुझे जॉली एलएलबी पार्ट-2 का वह आखिरी सीन याद आ रहा है, जिसमें अक्षय कुमार सरकारी वकील से कहते हैं कि 25-30 लाख ज्यादा दे दिए तो आपका भी नंबर आ जाएगा। भस्मासुर का इतिहास तो सनातन है। कल भी, आज भी और कल भी।

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