किस जाति-धर्म के लोग यूपीएससी में आवेदन करें, तय कर दो



युसूफ किरमानी 

सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के नफ़रत फैलाने वाले शो पर आज रोक तो लगा दी...लेकिन जो नुक़सान होना था वो तो हो ही चुका।...उसने नैरेटिव तय कर दिया। उसने केन्द्र सरकार का काम कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट या कोई कोर्ट बस छाती पीटता रहे।

मैंने बहुत ही पढ़े लिखे लोगों के मुँह से ये शब्द निकलते पाए - सिविल सर्विस और डॉक्टरी में अब मुल्ले भी घुसपैठ करने लगे हैं। पहले रिजर्वेशन ने मारा हुआ था, अब मुल्ले परेशान कर रहे हैं।...

आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ज़हर कहाँ तक फैलाया जा चुका है। सुदर्शन टीवी के शो - यूपीएससी के जरिए सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की घुसपैठ - जो कहना चाहता था, वही बात कुछ लोग अब प्रचारित भी कर रहे हैं। यानी एक सोची समझी साज़िश के तहत इस नैरेटिव को तैयार किया गया था।

छह साल से ग़ैर कांग्रेसी सरकार है। यूपीएससी से लेकर हर सरकारी संस्थान पर ग़ैर कांग्रेसी क़ब्ज़ा है। इसके बावजूद आप लोगों को अपने यूपीएससी और मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया पर भरोसा नहीं है। 

अब तो बस यही नियम बनना बाकी है कि यूपीएससी में किस किस जाति और धर्म के लोग आवेदन कर सकते हैं। किस जाति के लोग ही डॉक्टरी पढ़ सकते हैं। ....कौन पीएचडी कर सकता है? ताकि उमर ख़ालिद जैसे पीएचडी भी न कर पायें, ये पढ़ेंगे तो देश बिखर जाएगा। इन्हें पीएचडी करने से रोकना होगा। बना लो नियम...ऐसा मौक़ा नहीं मिलेगा।

आख़िर जब मनु महाराज की वर्ण व्यवस्था भारत में अब तक चल सकती है तो कौन सी नौकरियाँ किस जाति के लोग करेंगे, उसे तय करने में क्या हर्ज है?

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