सुदर्शन टीवी के UPSC जिहाद के मामले में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा


सौमित्र रॉय 

सुप्रीम कोर्ट में सुदर्शन टीवी के यूपीएससी जिहाद के मामले में आज केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के मामले में एक तंत्र बना हुआ है। कोर्ट को डिजिटल चैनलों के लिए तंत्र बनाने पर सोचना चाहिए। 


सवाल यह है कि अगर तंत्र बना हुआ है तो फिर चुनाव से पहले नमो टीवी का अचानक प्रकट होना और फिर गायब हो जाना क्या है ?अगर तंत्र बना हुआ है तो अरनब अपने चैनल में रोज आपत्तिजनक तरीके से दूसरों को अपमानित करते हुए क्यों ललकारते हैं ?


अगर वाकई तंत्र बना हुआ है तो सुदर्शन चैनल खुलेआम मुस्लिमों के यूपीएससी परीक्षा में भाग लेने को षड्यंत्र कैसे बता रहा है। यानी अगर तंत्र है तो उसे केंद्र के इशारे पर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है, क्योंकि ये चैनल एक खास सांप्रदायिक विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं। या फिर प्रॉपगेंडा कर रहे हैं।

जहां तक डिजिटल चैनलों की बात है तो ढेरों बिकाऊ चैनलों की भीड़ में कई चैनल ऐसे भी हैं जो तथ्यों और विचारों को निष्पक्षता से रखते हैं। सुदर्शन टीवी ने अपने जवाब में कहा है कि वह तो यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम में खोजी पत्रकारिता कर रहा था।

उसने अनजान स्रोतों के हवाले से दावा किया है कि यूपीएससी में बैठने वाले मुस्लिम बच्चों को जकात फाउंडेशन से मदद मिलती है और इस फाउंडेशन का आतंकियों से संबंध है। बेंच ने सीजेआई से कल इस पर विस्तार से सुनवाई की अनुमति मांगी है। कल फिर सुनवाई होगी।

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