जौनपुर में धड़ल्ले से चल रहा है नकली दवा का व्यवसाय, हाकिम और हुकुमरान बेखबर


 

रियाजुल हक 

 जौनपुर ! जनपद का दवा व्यवसाय इस समय नकली के गोरखधंधे में   उलझ कर रह गया है। जबकि दवा व्यवसाय की  निगाहबानी के लिए जिम्मेदार औषधि निरीक्षक प्रतिदिन जनपद में जांच-पड़ताल और छापेमारी करते नजर आ रहे हैं, लेकिन इस जांच-पड़ताल, छापेमारी के बावजूद परिणाम ढाक के तीन पात हैं। जानकार बताते हैं  की पूरे जनपद में नकली और अधोमानक दवाओं की अवैध व्यवसाय का पूरा का पूरा तंत्र विकसित हो चुका है जो बिना लाइसेंसी झोलाछाप चिकित्सकों नर्सिंग होम के साथ-साथ दवा व्यवसायियों को भी सस्ते माल का लालच देकर दवाओं को   बिकवा रहा है

इसका सीधा असर दवा के खुदरा व्यवसाय पर दिख रहा है ।जनपद में जिला मुख्यालय समेत जगह-जगह डिस्काउंट पर दवाएं बेचने का दावा किया जा रहा है। ज्ञात रहे की दवा व्यवसाय के लिये बनाए गए नियमों के तहत दवाएं ऐसे डिस्काउंट का दावा कर नहीं बेची जा सकती ।लेकिन फुटकर दवा व्यवसाई अपना व्यवसाय चमकाने के चक्कर में बिना बिल की नकली और अधोमानक दवाएं खरीदकर धड़ल्ले से डिस्काउंट पर बेच रहे हैं।

वहीं जनपद में दवा व्यवसाय पर निगरानी के लिए तैनात औषधि निरीक्षक अमित बंसल  इन सारे नियम उल्लंघनों को लगातार नजरअंदाज करते जा रहे हैं। हालांकि प्राप्त जानकारी के अनुसार औषधि निरीक्षक नियमित रूप से जनपद तहसील मुख्यालय समेत ग्रामीण अंचलों के मेडिकल स्टोरों पर नियमित रूप से जांच और छापेमारी कर रहे हैं।

 लेकिन यह विस्मयकारी है कि लगातार कोशिशों के बाद भी नतीजे ना के बराबर है ।प्रमाण के लिए बात सामने लाई जा रही है कि पूरे जनपद  जिला मुख्यालय समेत 300-400 दुकानें बिना लाइसेंस, अधूरे या अनधिकृत लाइसेंस पर चलाई जा रही हैं। कई दुकानें तो लोन लाइसेंस बता कर चलाई जा रही हैं जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है।

लेकिन जनपद के औषधि निरीक्षक अमित बंसल ने अपने 1 साल से ज्यादा के कार्यकाल के दौरान सिर्फ दो बिना लाइसेंसी दुकानों के खिलाफ विधिक कार्यवाही की अब इसे आप जिम्मेदार औषधि निरीक्षक की अनदेखी कहेंगे या लापरवाही या फिर कि नहीं अज्ञात कारणों से इन मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है ऐसा नहीं है कि बगैर लाइसेंस की गलत परिसर में चल रही दुकाने ही अकेली समस्या हो जिनके द्वारा नकली दवाएं जनमानस तक पहुंच रही हैं औषधि निरीक्षक की अनदेखी के कारण जनपद में नशीली दवाओं और कफ सिरप से नशा करने वालों की संख्या दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जा रही है जानकारों का दावा है कि जिला मुख्यालय पर ही आधा दर्जन से ज्यादा दवा व्यवसाई इस अवैध धंधे में संलिप्त हैं और मोटी कमाई का मोटा हिस्सा जिम्मेदारों के मुंह बंद करने के काम आ रहा है

जनपद में नकली दवा व्यवसाय के फलने फूलने का एक बड़ा कारण और है, और वह है दवा बेचते समय दवा का कैश मेमो न देना ।  दवा उपभोक्ता का अधिकार है कि उसे दवा की हर खरीद के साथ कैश मेमो मिलना चाहिए।  नियमानुसार ड्रग एक्ट के तहत प्रत्येक दवा उपभोक्ता को निर्धारित फॉर्मेट पर कैश मेमो दिया जाना चाहिए ।

बिना कैश मेमो की दवाएं बेच कर दवा व्यवसाई अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं इसीलिए वह धड़ल्ले से स्वयं भी बिना बिल की  अवैध दवाएं  खरीद कर जरूरतमंदों को  बेचते हैं

 सूत्र बताते हैं कि जनपद में दवा व्यवसायियों के दो संगठन हैं और दोनों ही संगठन ऐसे अवैध व्यवसायियों  पर कार्रवाई के समय जिम्मेदारों के सामने दीवार बनकर खड़े हो जाते हैं  


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